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पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठगरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ काल
दंपति की इचà¥à¤›à¤¾ होती है कि उनके घर में आने वाला नया सदसà¥à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤° ही हो। कà¥à¤› लोग पà¥à¤¤à¥à¤°-पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ में à¤à¥‡à¤¦ नहीं करते, à¤à¤¸à¥‡ लोगों का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बहà¥à¤¤ कम है। यदि आप पà¥à¤¤à¥à¤° चाहते हैं या पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ चाहते हैं तो कà¥à¤› तरीके यहां दिठजा रहे हैं, जिन पर अमल कर उसी तरीके से समà¥à¤à¥‹à¤— करें तो आप कà¥à¤› हद तक अपनी मनचाही संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकते हैं-
पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ हेतॠमासिक धरà¥à¤® के चौथे दिन सहवास की रातà¥à¤°à¤¿ आने पर à¤à¤• पà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¾ à¤à¤°à¤•र चावल का धोवन यानी मांड में à¤à¤• नीबू का रस निचोड़कर पी जावें। अगर इचà¥à¤›à¥à¤• महिला रजोधरà¥à¤® से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ पाकर लगातार तीन दिन चावल का धोवन यानी मांड में à¤à¤• नीबू निचोड़कर पीने के बाद उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ से पति के साथ सहवास करे तो उसकी पà¥à¤¤à¥à¤° की कामना के लिठà¤à¤—वान को à¤à¥€ वरदान देना पड़ेगा। गरà¥à¤ न ठहरने तक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¹ यह पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— तीन दिन तक करें, गरà¥à¤ ठहरने के बाद नहीं करें।
गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के संबंध में आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में लिखा है कि गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ ऋतà¥à¤•ाल (मासिक धरà¥à¤®) की आठवीं, दसवीं और बारहवीं रातà¥à¤°à¤¿ को ही किया जाना चाहिà¤à¥¤ जिस दिन मासिक ऋतॠसà¥à¤°à¤¾à¤µ शà¥à¤°à¥‚ हो, उस दिन तथा रात को पà¥à¤°à¤¥à¤® दिन या रात मानकर गिनती करना चाहिà¤à¥¤ छठी, आठवीं आदि सम रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤¤à¥à¤° उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ के लिठऔर सातवीं, नौवीं आदि विषम रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ के लिठहोती हैं अतः जैसी संतान की इचà¥à¤›à¤¾ हो, उसी रातà¥à¤°à¤¿ को गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ करना चाहिà¤à¥¤
इस संबंध में à¤à¤• और बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि इन रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के समय शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤· यानी चांदनी रात (पूरà¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾) वाला पखवाड़ा à¤à¥€ हो, यह अनिवारà¥à¤¯ है, यानी कृषà¥à¤£ पकà¥à¤· की रातें हों तो गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ की इचà¥à¤›à¤¾ से सहवास न कर परिवार नियोजन के साधन अपनाना चाहिà¤à¥¤
शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤· में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾ की कलाà¤à¤‚ बढ़ती हैं। इसी पà¥à¤°à¤•ार ऋतà¥à¤•ाल की रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का कà¥à¤°à¤® जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पà¥à¤¤à¥à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेकà¥à¤·à¤¾ आठवीं, आठवीं की अपेकà¥à¤·à¤¾ दसवीं, दसवीं की अपेकà¥à¤·à¤¾ बारहवीं रात अधिक उपयà¥à¤•à¥à¤¤ होती है।
पूरे मास में इस विधि से किठगठसहवास के अलावा पà¥à¤¨à¤ƒ सहवास नहीं करना चाहिà¤, वरना घपला à¤à¥€ हो सकता है। ऋतॠदरà¥à¤¶à¤¨ के दिन से 16 रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में शà¥à¤°à¥‚ की चार रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹à¤µà¥€à¤‚ व तेरहवीं और अमावसà¥à¤¯à¤¾ की रातà¥à¤°à¤¿ गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के लिठवरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कही गई है। सिरà¥à¤« सम संखà¥à¤¯à¤¾ यानी छठी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं और चौदहवीं रातà¥à¤°à¤¿ को ही गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ संसà¥à¤•ार करना चाहिà¤à¥¤
गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ वाले दिन व रातà¥à¤°à¤¿ में आहार-विहार à¤à¤µà¤‚ आचार-विचार शà¥à¤ पवितà¥à¤° रखते हà¥à¤ मन में हरà¥à¤· व उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ रखना चाहिà¤à¥¤ गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के दिन से ही चावल की खीर, दूध, à¤à¤¾à¤¤, शतावरी का चूरà¥à¤£ दूध के साथ रात को सोते समय, पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒ मकà¥à¤–न-मिशà¥à¤°à¥€, जरा सी पिसी काली मिरà¥à¤š मिलाकर ऊपर से कचà¥à¤šà¤¾ नारियल व सौंफ खाते रहना चाहिà¤, यह पूरे नौ माह तक करना चाहिà¤, इससे होने वाली संतान गौरवरà¥à¤£, सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥, सà¥à¤¡à¥Œà¤² होती है।
गोराचन 30 गà¥à¤°à¤¾à¤®, गंजपीपल 10 गà¥à¤°à¤¾à¤®, असगंध 10 गà¥à¤°à¤¾à¤®, तीनों को बारीक पीसें, चौथे दिन सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ के बाद पांच दिनों तक पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में लाà¤à¤‚, गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के साथ ही पà¥à¤¤à¥à¤° अवशà¥à¤¯ पैदा होगा।
शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ व गोरे पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिà¤â€”
गरà¥à¤à¤¿à¤£à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ ढाक (पलाश) का à¤à¤• कोमल पतà¥à¤¤à¤¾ घोंटकर गौदà¥à¤—à¥à¤§ के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ और गोरा होता है | माता-पीता à¤à¤²à¥‡ काले हों, फिर à¤à¥€ बालक गोरा होगा | इसके साथ सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¶ की २-२ गोलियां लेने से संतान तेजसà¥à¤µà¥€ होगी |
यदि आपकी संनात होती हो परनà¥à¤¤à¥ जीवित न रहती हो तो सनà¥à¤¤à¤¾à¤¨ होने पर मिठाई के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर नमकीन बांटें।
à¤à¤—वान शिव का अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• करायें तथा सूरà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ के समय तिल के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के पास जलायें, लाठअवशà¥à¤¯ होगा। मां दà¥à¤°à¥à¤—ा के दरबार में सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामिगà¥à¤°à¥€ चढ़ाये तथा कà¥à¤‚जिका सà¥à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤° का पाठकरें तो à¤à¥€ अवशà¥à¤¯ लाठमिलेगा।
पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ हेतॠगरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ का तरीका—–
पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ गà¥à¤°à¤‚थों में पà¥à¤¤à¥à¤°-पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ हेतॠदिन-रात, शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤·-कृषà¥à¤£ पकà¥à¤· तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महतà¥à¤µ बताया गया है। धरà¥à¤® गà¥à¤°à¤‚थों में à¤à¥€ इस बारे में जानकारी मिलती है।
यदि आप पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना चाहते हैं और वह à¤à¥€ गà¥à¤£à¤µà¤¾à¤¨, तो हम आपकी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ के लिठहम यहाठमाहवारी के बाद की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जानकारी दे रहे हैं।
चौथी रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पैदा पà¥à¤¤à¥à¤° अलà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥ और दरिदà¥à¤° होता है।
पाà¤à¤šà¤µà¥€à¤‚ रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से जनà¥à¤®à¥€ कनà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में सिरà¥à¤« लड़की पैदा करेगी।
छठवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से मधà¥à¤¯à¤® आयॠवाला पà¥à¤¤à¥à¤° जनà¥à¤® लेगा।
सातवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पैदा होने वाली कनà¥à¤¯à¤¾ बांठहोगी।
आठवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पैदा पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ होता है।
नौवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¿à¤¨à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पैदा होती है।
दसवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से चतà¥à¤° पà¥à¤¤à¥à¤° का जनà¥à¤® होता है।
गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹à¤µà¥€à¤‚ रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से चरितà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¨ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पैदा होती है।
बारहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® पà¥à¤¤à¥à¤° जनà¥à¤® लेता है।
तेरहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤® से वरà¥à¤£à¤¸à¤‚कर पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ जनà¥à¤® लेती है।
चौदहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से उतà¥à¤¤à¤® पà¥à¤¤à¥à¤° का जनà¥à¤® होता है।
पंदà¥à¤°à¤¹à¤µà¥€à¤‚ रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पैदा होती है।
सोलहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से सरà¥à¤µà¤—à¥à¤£ संपनà¥à¤¨, पà¥à¤¤à¥à¤° पैदा होता है।
वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ मà¥à¤¨à¤¿ ने इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ के आधार पर पर अमà¥à¤¬à¤¿à¤•ा, अमà¥à¤¬à¤¾à¤²à¤¿à¤•ा तथा दासी के नियोग (समागम) किया, जिससे धृतराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, पाणà¥à¤¡à¥ तथा विदà¥à¤° का जनà¥à¤® हà¥à¤†à¥¤ महरà¥à¤·à¤¿ मनॠतथा वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ मà¥à¤¨à¤¿ के उपरोकà¥à¤¤ सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ दयानंद सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ ने अपनी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• ‘संसà¥à¤•ार विधि’ में सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से कर दी है। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤•ाल के महान चिकितà¥à¤¸à¤• वागà¥à¤à¤Ÿ तथा à¤à¤¾à¤µà¤®à¤¿à¤¶à¥à¤° ने महरà¥à¤·à¤¿ मनॠके उपरोकà¥à¤¤ कथन की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿
पूरà¥à¤£à¤°à¥‚प से की है।
गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤â€”–
जिस सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को जिस दिन मासिक धरà¥à¤® हो,उससे चार रातà¥à¤°à¤¿ पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ सम रातà¥à¤°à¤¿ में जबकि शà¥à¤ गà¥à¤°à¤¹ केनà¥à¤¦à¥à¤° (१,४,à¥,१०) तथा तà¥à¤°à¤¿à¤•ोण (१,५,९) में हों,तथा पाप गà¥à¤°à¤¹ (३,६,११) में हों à¤à¤¸à¥€ लगà¥à¤¨ में पà¥à¤°à¥à¤· को पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिये अपनी सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के साथ संगम करना चाहिये। मृगशिरा अनà¥à¤°à¤¾à¤§à¤¾ शà¥à¤°à¤µà¤£ रोहिणी हसà¥à¤¤ तीनों उतà¥à¤¤à¤°à¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¤à¤¿ धनिषà¥à¤ ा और शतà¤à¤¿à¤·à¤¾ इन नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में षषà¥à¤ ी को छोड कर अनà¥à¤¯ तिथियों में तथा दिनों में गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ करना चाहिये।
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